भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों में विभाजित है। पहला चरण PHWR तकनीक पर आधारित था। इसके विपरीत, दूसरा चरण Fast Breeder Reactor (FBR) तकनीक का उपयोग करता है।
खास बात यह है कि इसे ‘ब्रीडर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे कहीं ज्यादा पैदा करता है। परिणामस्वरूप, यह दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध तकनीक है।
- भारत ने न्यूक्लियर फेज 2 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि है।
- ऐतिहासिक कदम: भारत ने कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के मुख्य चरण को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: यह तकनीक भारत को बिजली संकट से पूरी तरह मुक्त करने की क्षमता रखती है।
- स्वदेशी तकनीक: यह पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ प्रोजेक्ट है, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
- कचरे का उपयोग: पहले चरण के परमाणु कचरे को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है।
- क्या है न्यूक्लियर फेज-2 और PFBR?
- भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों में विभाजित है।
- पहला चरण PHWR (Pressurized Heavy Water Reactors) था, जो यूरेनियम का उपयोग करता था।
- दूसरा चरण, जिसे अब पूरा किया गया है, Fast Breeder Reactor (FBR) तकनीक पर आधारित है।
- इसे “ब्रीडर” इसलिए कहा जाता है यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे कहीं ज्यादा ईंधन (Plutonium) पैदा करता है।
- यह दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध तकनीक है।
- भारत के लिए क्यों है यह गर्व की बात?
भारत के पास यूरेनियम का भंडार सीमित है, लेकिन हमारे पास थोरियम (Thorium) का विशाल भंडार है। यही कारण है कि फेज-2 का पूरा होना इतना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, इस तकनीक से पैदा होने वाली बिजली कोयले के मुकाबले काफी सस्ती होगी। अंततः, यह कार्बन मुक्त ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा।
- थोरियम का रास्ता खुला: फेज-2 के पूरा होने का मतलब है कि अब भारत तीसरे चरण की ओर बढ़ सकता हैI
- जहाँ हम अपने थोरियम भंडार का उपयोग करके हजारों सालों तक सस्ती बिजली पैदा कर सकेंगे।
- इस तकनीक से पैदा होने वाली बिजली लंबे समय में कोयले और प्राकृतिक गैस के मुकाबले काफी सस्ती होगी।
- कम प्रदूषण: यह कार्बन मुक्त ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरेगा, जिससे ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में मदद मिलेगी।
रक्षा और विज्ञान विशेषज्ञों की राय (Expert Opinion)
- वैज्ञानिकों का मानना है कि यह भारत की “ऊर्जा संप्रभुता” (Energy Sovereignty) की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। वास्तव में
- डॉ. होमी जहांगीर भाभा का सपना: विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि महान वैज्ञानिक डॉ. भाभा के उस सपने को पूरा करती है जिसमें भारत को अपने संसाधनों पर निर्भर रहना था।
- रणनीतिक बढ़त: परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता का सीधा मतलब है कि भारत को अब ईंधन के लिए किसी दूसरे देश के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
- आगे की राह: फेज-3 और भविष्य
- फेज-2 के सफल कार्यान्वयन के बाद अब परमाणु विभाग का पूरा ध्यान Advanced Heavy Water Reactor (AHWR) पर होगा। यदि फेज-3 सफल होता है, तो भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश होगा जो थोरियम से बिजली बनाने में पूर्ण सक्षम होगा।
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